कृतिम मानव मस्तिष्क पर रिसर्च कर रहा जापान, अगले कुछ महीनों में दुनिया के सामने होगा परिणाम : डॉ. अनिरबन ..........

डॉ. अनिरबन ने कहा कि वो वर्ष 2005 तक कोलकाता के इंडियन एसोसिएशन फोर दि कल्टीवेशन साइंस में काम कर रहे थे। जापान ने इंटरनेशनल प्रतियोगिता के जरिए उनका चयन हयूमन ब्रेन तैयार करने के प्रोजेक्ट के लिए किया। जब तक वह जापान पहुंचे उनकी जरूरत के अनुसार वर्ल्ड क्लास लैब तैयार की जा चुकी थी। पिछले 15 साल में प्रोजेक्ट को लगभग पूरा कर चुके हैं। जल्द ही ह्यून माइंड का फर्स्ट वर्जन दुनिया के सामने आने वाला है। जिससे हम बातचीत कर सकेंगे। इसके लिए लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

कृतिम मानव मस्तिष्क पर रिसर्च कर रहा जापान, अगले कुछ महीनों में दुनिया के सामने होगा परिणाम : डॉ. अनिरबन ..........

 महेन्द्रगढ़ स्थित हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित इंटरनेशनल को कॉन्फ्रेंस में पधारे जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर मैटिरियल साइंस में मानव मस्तिष्क निर्माण कार्य से जुड़े वैज्ञानिक डॉ. अनिरबन बंध्योपध्याय ने बताया कि अगले कुछ महीने में कृत्रिम मानव मस्तिष्क दुनिया के सामने आने वाला है। करीब 15 साल की रिसर्च अब पूरी होने के कगार पर है। जापान ने इसके लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। मानव प्रजाति के इतिहास में यह सबसे बड़ा अनुसंधान होगा।  उनका कहना है कि कृत्रिम मस्तिष्क को मानव मस्तिष्क की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह एक नेचुरल इंटेलीजेंस होगी। जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर मैटिरियल साइंस में मानव मस्तिष्क निर्माण कार्य से जुड़े वैज्ञानिक डॉ. अनिरबन बंध्योपध्याय ने दावा किया है कि मानव मस्तिष्क तैयार कर लेना अब तक की सबसे बड़ी रिसर्च होगी। दुनिया में सबसे बड़ी सुपर पावर मानव मस्तिष्क है। अब हम मानव मस्तिष्क तैयार करने में कामयाब हो गए हैं। मूल रूप से भारतीय डॉ. अनिरबन बंध्योपध्याय ने बताया कि दुनिया भर में 16 देश मानव मस्तिष्क तैयार करने पर रिसर्च कर रहे हैं।जिसमें चाइना, यूरोपीयन , जापान सबसे अधिक पैसा खर्च कर रहा है। गूगल ने भी 2014 में मानव मस्तिष्क तैयार करने का एलान किया था। कृत्रिम मस्तिष्क अब तक रोबोट में ही उपयोग किया जाता है। जिसमें प्रोग्रामिंग कोडिंग होती है। वह कुछ चुनिंदा सवालों के जवाब ही दे सकता है तो उसमें डाले गए हों। अब नेचुरल माइंड तैयार हो गया है। जिसमें प्रोग्राम कोडिंग नहीं होगी। डॉ. अनिरबन ने कहा कि मानव का दिमाग हमेशा विकसित होता रहता है। जिस तरह से हमारे शरीर में लगातार बदलाव होते हैं। उसी तरह से हमारे मस्तिष्क में भी बदलाव आते रहते हैं।बहुत जल्द आएगा फर्स्ट वर्जन डॉ. अनिरबन ने कहा कि वो वर्ष 2005 तक कोलकाता के इंडियन एसोसिएशन फोर दि कल्टीवेशन साइंस में काम कर रहे थे। जापान ने इंटरनेशनल प्रतियोगिता के जरिए उनका चयन हयूमन ब्रेन तैयार करने के प्रोजेक्ट के लिए किया। जब तक वह जापान पहुंचे उनकी जरूरत के अनुसार वर्ल्ड क्लास लैब तैयार की जा चुकी थी। पिछले 15 साल में प्रोजेक्ट को लगभग पूरा कर चुके हैं। जल्द ही ह्यून माइंड का फर्स्ट वर्जन दुनिया के सामने आने वाला है। जिससे हम बातचीत कर सकेंगे। इसके लिए लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। गूगल, यूरोपीय देशों ने जो माइंड विकसित किया है उसे चलाने के लिए करीब 1200 मेगावाट बिजली की जरूरत पड़ रही है। जो दो न्यूक्लीयर पावर हाउस से मिलेगी। नेचुरल माइंड 20 वाट के हिसाब से एनर्जी उपयोग करता है। जापान की रिसर्च में भी इसी ऊर्जा क्षमता वाले माइंड को तैयार करने के प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। इतनी ऊर्जा घर में छोटे बल्ब को जलाने पर खर्च होती है।