गुरुग्राम में भूख ने भुला दी सोशल डिस्टेंसिंग

साइबर सिटी के रूप में विश्व में प्रसिद्धि गुरुग्राम जहां एक तरफ गगनचुम्बी इमारते है जहा लोग अपने एयर कंडीशन घरो में बैठकर लॉक डाउन की पालन कर रहे है तो वही दूसरी तरफ इन इमारतों को बनाने वाले हाथ भूख से परेशान है। उन हाथो में इतने पैसे नहीं है की वो अपने घर का गुजारा कर सके , अपना और अपने परिवार का पेट पाल सके।

गुरुग्राम में भूख ने भुला दी सोशल डिस्टेंसिंग

गुरुग्राम (संजय खन्ना) || साइबर सिटी के रूप में विश्व में प्रसिद्धि गुरुग्राम  जहां एक तरफ गगनचुम्बी इमारते है  जहा लोग अपने एयर कंडीशन घरो में बैठकर लॉक डाउन की पालन कर रहे है तो वही दूसरी तरफ इन इमारतों को बनाने वाले हाथ भूख से परेशान है। उन हाथो में इतने पैसे नहीं है की वो अपने घर का गुजारा कर सके , अपना और अपने परिवार का पेट पाल सके। भूख के कारण ये लोग सोशल डिस्टेंस को भूल रहे है । पुलिस और जिला प्रशासन की टीम भी सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करवाने में नाकाम साबित हो रही है 

इन तस्वीरों को देखकर आप भी हैरान हो जाएंगे की ,कैसे हजारो मजदूर लम्बी लाइन में खड़े है। जहा तक आपकी नजर जाएगी मजदूर ही मजदूर दिखेंगे इनके हाथो में थैला है।  और चेहरे पर मायूसी। ये मजदूर इस इन्तजार में है की कब खाना आएगा जिसे खाकर ये लोग अपने पेट की भूख शांत कर पाएंगे। क्योकि पेट की भूख है न साहब बिना खाना खाए  मिटती ही नहीं । यहाँ आदमी ही नहीं बल्कि महिलाएं भी है जो दूसरी तरफ लाइनों में खड़ी है। ये वो मजदूर है जो लॉक डाउन के कारण परेशांन है । इनके घर पर खाने का एक दाना तक नहीं है । इसलिए ये लोग मज़बूरी में अपने घरो से निकलकर बिना सोशल डिस्टेंस मेंटेन किए प्रशासन द्वारा बनाए गए रिलीफ सेंटर की लाइनों में लग जाते  है। यहाँ इन लोगो को सोशल डिस्टेंस मेंटेन करवाने के लिए ना तो पुलिस  होती है और ना ही निगम की टीम जो इन्हे खाना बाटती है।.यहाँ प्रतिदिन 10 हजार मजदूरों के लिए खाना आता है 

तो सुना आपने की कैसे मजदूर सुंबह से लंबी लंबी लाइनों में खड़े हो जाते है लेकिन खाना इन्हे दोपहर में मिलता है । अब ऐसे में आप खुद ही अंदाजा लगा सकते है की आजकल जहां दिन बड़े होने के चलते लोग 8 बजे ही सुबह का नाश्ता कर लेते है वहीं ये मजदूर भूख से परेशान सूरज की पहली किरण निकलते ही ये मजदुर भी निकल पड़ते है खाने की तलाश में ।अब दूसरी तरफ आप इन जनाब का बयान सुनिए ये पार्षद रह चुके है और मौजूदा पार्षद के पति हैं। इन्हे जिला प्रशासन ने खाना वितरण करने के लिए जिम्मेदारी सौपी है 

इलाके के पूर्व  पार्षद की माने तो इनका कहना है की यहाँ खड़े मजदूरों को सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करवाने के लिए बार बार जागरूक किया जाता है लेकिन लोग मानते नहीं है। वही इनका यह भी कहना है की हमारे पास तीस वोलेंटियर है अब ऐसे में आप ही सोचिये की अगर दो वोलिंटियर खड़े होकर इन लाइनों में एक बार घूम जाए तो सभी लोग सोशल डिस्टेंस मेंटेन कर लेंगे लेकिन इनके वोलेंटियर को धूप लगेगी क्योकि यहाँ मजदुर तो  धूप में खड़े हो सकते है लेकिन इनके द्वारा मनोनीत सदस्य इन लोगो को समझाने के लिए धूप में 30 मिनट खड़ा नहीं हो सकते । आप तस्वीरों में भी देख सकते है की कैसे मजदूर पहले चिपक कर खड़े थे लेकिन जैसे ही मीडिया पहुंची तो लोगो ने अपने आप सोशल डिस्टेंस मेंटेन करना शुरू कर दिया तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ये वोलेंटियर कितने संजीदा है अपने काम को अंजाम देने  लिए।आपको बता दे की गुरुग्राम में कोरोना संक्रमित के 36 मामले सामने आ चुके है लेकिन फिर भी जिला प्रसासन लापरवाही बरतने से बाज नहीं आ रहा है।