घरौंडा टोल प्लाजा पर किसानों ने लोहडी पर्व पर तीन कृषि कानूनों की जलाई प्रतियां...

घरौंडा टोल प्लाजा पर आन्दोलनकारी किसानों ने लोहडी पर्व पर तीन कृषि कानूनों की जलाई प्रतियां,केन्द्र व राज्य सरकार के खिलाफ की जोरदार नारेबाजी | सुप्रिम कोर्ट द्वारा बनाई गई चार सदस्सीय कमेटी को नकारा,24 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च करेगा दिल्ली की तरफ कूच |

घरौंडा टोल प्लाजा पर किसानों ने लोहडी पर्व पर तीन कृषि कानूनों की जलाई प्रतियां...

Gharaunda (Surender Panchal) || घरौंडा बसताड़ा टोल प्लाजा पर लोहड़ी के पर्व पर किसानों ने तीन कृषि कानून के विरुद्ध चल रहे आंदोलन के खिलाफ सरकार द्वारा लागू किये गए तीन कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर रोष प्रदर्शन किया। बसताडा टोल प्लाजा किसानों का तीन कृषि कानून के विरोध में धरना प्रदर्शन पिछले 19 दिन से चल रहा है। किसानों ने विरोध जताते हुए लोहडी के पर्व पर तीनों कृषि बिलों की प्रतियां जलाई।

भारतीय किसान यूनियन के जिला महामंत्री जगदीप सिंह औलख ने कहा कि किसानों ने हर जिले में जगह-जगह तीन कृषि कानूनों की प्रतियां जलाने का कार्यक्रम रखा था, साथ ही आने वाली 24 जनवरी को पूरे प्रदेश के जिलों से ट्रैक्टरों का मार्च दिल्ली की तरफ कूच करेगा व 26 जनवरी को लाल किले पर किसान झण्डा फहराएगा। उन्होने कहा कि आंदोलन के दौरान दिल्ली  हर रोज 3 से 4 किसान शहीद हो रहे हैं  और सरकार आंखे मूंदे बैठी है। दिल्ली में किसानों का धरना प्रदर्शन 49 दिन से चल रहा है इतने लम्बे चल रहे आंदोलन के दौरान सरकार का अभी तक कोई भी फैसला किसानों के हित में नहीं आया है। सरकार की तरफ से किसानों को तारिख पै तारीख मिल रही है। उन्होने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए फैसले के अनुसार जो 4 सदस्य कृषि कानून के समाधान के  लिए चयनित किए गए हैं वो चार सदसय भी  सरकार के नुमाइंदे हैं, हम उन चारों सदस्यों का विरोध करते हैं  क्योंकि वो भी सरकार के साथ इन कानूनों के समर्थन में है। हम  सुप्रीम कोर्ट पर पूर्ण भरोसा रखते है और अनुरोध करते हैं कि किसानों के बीच किसान हितैषी सदस्य चुनें ताकि किसानों की बात सरकार तक पहुंच सके। अगर सरकार हमारी मांगे नही मानती तो हमारा आंदोलन इसी प्रकार जारी रहेगा।

पूर्व सैनिक लखी राम आर्य वन रैंक वन पेंशन के पूर्व टीम के प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पूर्व सैनिकों के साथ किसानों के इस आंदोलन में समर्थन देते हुए बताया कि देश में 70 प्रतिशत से ज्यादा किसान परिवार रहते हैं। देश भी किसानों पर निर्भर है, उसके बावजूद भी सरकार कृषि कानूनों को लाकर किसानों के साथ मजाक कर रही है। सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट द्वारा चार सदस्य मनोनीत किए गए हैं, कृषि कानूनों को लेकर वे भी सरकार के नुमाइंदे हैं। भविष्य में यह आंदोलन और ज्यादा बड़ा व भयानक रूप ले सकता है और सरकार व आम जनता का बडा नुकसान हो सकता है। उन्होने सरकार से अपिल करते हुए कहा कि जनता, किसानों व जवानों का ध्यान रखते हुए सरकार इन कानूनों को वापस लेकर किसानों की बात मान लें, ताकि किसानों को समय पर उसकी एमएसपी का मानदेय मिलने के साथ-साथ उसे गारंटी भी मिल सके। अंबानी-अडानी जैसे व्यापारियों के हाथों में हम देश को बिकने नहीं देंगे और आंदोलन इसी प्रकार जारी रहेगा।