राजस्थान के कोटा में फंसे यमुनानगर के 6 स्टूडेंट्स सरकार की मदद से वापस अपने घर लौटे

राजस्थान के कोटा में फंसे यमुनानगर के 6 स्टूडेंट्स सरकार की मदद से वापस लौट आये।सभी स्टूडेंट्स ने बताया कि एक महीने से वो और उनका से वो भी परेशान हो रहे थे और यहाँ उनके परिवार भी।फ़िलहाल सभी स्टूडेंट्स ने अपने गृह क्षेत्र में पहुंच कर राहत की सांस ली है।

राजस्थान के कोटा में फंसे यमुनानगर के 6 स्टूडेंट्स सरकार की मदद से वापस अपने घर लौटे

यमुनानगर (सुमित ओबेरॉय) || राजस्थान के कोटा में फंसे यमुनानगर के 6 स्टूडेंट्स  सरकार की मदद से वापस लौट आये।सभी स्टूडेंट्स ने बताया कि एक महीने से वो और उनका से वो भी परेशान हो रहे थे और यहाँ उनके परिवार भी।फ़िलहाल सभी स्टूडेंट्स ने अपने गृह क्षेत्र में पहुंच कर राहत की सांस ली है। राजस्थान के कोटा में कोचिंग कर रहे यमुनानगर जिले के स्टूडेंट्स  वापस लौट आए।  रोडवेज की बस से पहले सिविल अस्पताल पहुंचे। स्टूडेंट्स के चेहरों पर थकान थी, लेकिन घर लौटने की खुशी भी थी। दो दिन बस में सफर करने के बाद अब यहां लौटे, तो सभी ने अपने स्वजनों से फोन पर बात की। हालांकि इन्हें उम्मीद थी कि अब वह घर चले जाएंगे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें समझाया बाद में इन्हें डीएवी डेंटल कॉलेज में क्वारंटाइन किया गया।

वापिस आई एक स्टूडेंट ने बताया कि पहली बार बस में बैठी हूं, हालत खराब हो गई । शिवानी मूल रुप से पिंजौरा की रहने वाली शिवानी के पिता सेना में है। वह इस समय पंजाब में तैनात है। शिवानी ने बताया कि वह नीट मेडिकल की तैयारी कर रही थी। तीन मई को एग्जाम होना था। लॉकडाउन लगा, तो यह परीक्षा स्थगित हो गई। लॉकडाउन के बाद से ही वह अकेली रह रही थी। कफ्र्यू लगा होने की वजह से उनके पापा भी नहीं आ सके। हर रोज घर बात होती थी। पापा हौंसला बढ़ाते थे। जब पता लगा कि सरकार ने बस भेजी है, तो वह भी बैठ गई। पहली बार बस में सफर कर रही थी। इसलिए घबराहट हो रही थी, लेकिन घर लौटने का कोई ओर चारा नहीं था। बस में हालत खराब हो गई। पंजाब नहीं जा सकती थी, इसलिए पापा ने यहां यमुनानगर आने के लिए कह दिया था। अब वह मिलने के लिए आ रहे हैं। 

यमुनानगर के चांदपुर के नीरज कोटा में एक साल से नीट की तैयारी कर रहे हैं। उनका भी तीन मई को एग्जाम होना था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से स्थगित हो गया। नीरज का कहना है कि लॉकडाउन लगने के साथ ही पूरी तरह से डिस्टर्ब हो गए। हॉस्टल खाली हो गया था। गिने चुने छात्र ही रह गए थे। सभी दुकानें बंद थी। हॉस्टल में खाना भी अच्छा नहीं मिल रहा था। पढ़ाई भी नहीं हो पा रही थी। बस यही मन में रहता था कि किसी तरह से घर चले जाएं। अब फाइनली यहां पहुंच गए हैं। अभी परिवार से नहीं मिले हैं। हालांकि घरवालों को बता दिया है कि वह यहां पहुंच गए हैं। कुछ स्टूडेंट्स ने बताया कि पढ़ाई नहीं हो रही थी, मन भी नहीं लग रहा था। लॉकडाउन के बाद से ही हॉस्टल खाली होने लगा। उनके रूम पार्टनर अपने घर चले गए थे। वह अकेले रह गए थे। ऐसे में पढ़ाई भी नहीं हो पा रही थी। कोचिंग सेंटर की ओर से ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही थी, लेकिन उससे भी कोई फायदा नहीं मिल रहा था। खाने की अलग से दिक्कत आ रही थी। कई बार तो सुबह का नाश्ता भी नहीं मिल पाया। जब पता लगा कि सरकार ने बस भेजी है, तो वह सामान तैयार कर बस में बैठ गए। सीएमओ डॉ विजय दहिया ने बताया कि 6 स्टूडेंट्स राजस्थान के कोटा से आज यमुनानगर पहुंचे है । सभी को डीएवी डेंटल कॉलेज में क्वारंटाइन किया गया।14 दिन का पीरियड पूरा होने के बाद उन्हें होम क्वारंटाइन किया जाएगा।